पत्थलगड़ी के नाम पर मौत का खेल, काट दिए गए 7 लोगों के सिर

- Advertisement -

कश्मीर से कन्याकुमारी तक अपना देश परंपराओं से पटा पड़ा है. मगर कुछ इलाके ऐसे हैं जहां की परंपरा सीधे अपने आप में कानून और सरकार है. एक पुरानी मगर मशहूर कहावत है. मेरी बात पत्थर की लकीर जैसी. इस कहावत को पत्थरों पर शब्दों की लकीर खींच कर बकायदा झारखंड के 13 ज़िलों के 50 गांवों के लोग लगातार सच कर रहे हैं. उनकी इस परंपरा का नाम है पत्थलगड़ी. मगर रविवार को इसी पत्थलगड़ी पंरपरा के नाम पर झारखंड में एक ऐसा खूनी खेला गया कि लाशें तक समेटने में पुलिस और सीआरपीएफ को 24 घंटे लग गए.

मौत का खौफनाक तांडव

सुदूर जंगली इलाका. ऊबड़ खाबड़ ज़मीन और हर कदम पर दुश्वारी. इन्हीं दुश्वारियों से पैदा होता विद्रोह और विद्रोह से परवान चढ़ती पत्थलगढ़ी की प्रथा. अबुआ धरती अबुआ राज का नारा और खुद को कायदे क़ानून से ऊपर समझने की ग़लतफ़हमी. कुछ इन्हीं हालात ने बीते रविवार को झारखंड के चाईबासा के नज़दीक मौजूद बुरूगुलीकेरा गांव में मौत का ऐसा तांडव मचाया कि देखने वालों के रौंगटे खड़े हो गए. गांव से लापता 7 लोगों की लाशें करीब 24 घंटे बाद सोमवार को तब बरामद हो सकीं जब पुलिस और सीआरपीएफ के भारी भरकम लवाज़में ने जंगली इलाकों की खाक छाननी शुरू की. चप्पे चप्पे पर कॉम्बिंग ऑपरेशन किया.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here