कोर्ट ने आगाह करते हुए कहा कि सर्वोच्च अदालत के फैसलों का सम्मान होना चाहिए.

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अमरोहा में साल 2008 में हुए हत्याकांड पर दायर पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट  ने अहम टिप्पणी की है. उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 12 साल पहले 10 महीने के बच्चे समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई थी जिसे लेकर कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की गई है. कोर्ट ने इस मामले में जो टिप्पणी की है उससे निर्भया केस में कानूनी पेचीदगियों से सजा टालने के हथकंडों पर कोर्ट की निगाह का भी पता चलता है.

‘फैसला देने में कोर्ट ने कहां की गलती?’

इस पुनर्विचार याचिका में सलीम और शबनम के वकील आंनद ग्रौवर ने  गरीबी और अशिक्षा का हवाला देते हुए उनकी सजा में रहम की मांग की. इस पर कोर्ट ने कहा कि देश में बहुत से लोग गरीब और अशिक्षित हैं, आप पुनर्विचार याचिका पर बहस कर रहे हैं, आप ये बताइये कि सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा देने के अपने फैसले में कहां गलती की है. बचाव पक्ष की दलीलों के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी पहलुओं को देखने के बाद फैसला दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि योजना बनाकर हत्या की गई थी, अपराधियों ने अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल करके घटना को अंजाम दिया. इस पर सलीम-शबनम के वकील ने कहा कि उसका बच्चा छोटा है, उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है.

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