छतों पर सोलर प्लांट लगाने से बनेंगे 3 लाख नौकरियों के मौके, सरकार ने उठाया कदम

शिक्षा/नौकरी

भारत में तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर साफ सुधरे वातावरण के साथ-साथ  करीब 3 लाख नौकरियां भी उपलब्ध कराएगा.  यह दावा काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट ऐंड वॉटर (CEEW) और नैचरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC) की स्टडी में किया गया है. स्टडी में कहा गया है कि विंड पावर से 34 हजार 600 जबकि जमीन पर लगाए गए सोलर प्रोजेक्ट्स से 58 हजार 600 और छतों पर लगे सोलर प्रॉजेक्ट्स से दो लाख 38 हजार नौकरियों के मौके बनेंगे.

सरकार ने उठाया कदम
रिन्यूअबल सेक्टर में फिलहाल जरूरी स्किल्स की बहुत कमी है. न्यू और रिन्यूअबल एनर्जी मिनिस्ट्री ने इस समस्या के समाधान करने के लिए स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स बनाया है. स्टडी के मुताबिक, सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग में फिलहाल लगभग 2900 लोग काम कर रहे हैं जबकि इस सेक्टर की डिमांड को घरेलू स्तर पर पूरा किया जाता है तो यहां और 45000 रोजगार के मौके बनेंगे.

1 मेगावॉट क्षमता का सोलर प्लांट से 25 लोगों को मिलता है रोजगार

स्टडी में दिलचस्प बात यह निकलकर आई है कि जमीन पर लगाए जाने वाले सोलर प्रॉजेक्ट्स के मुकाबले छतों पर लगने वाले प्रॉजेक्ट्स में ज्यादा नौकरियों के मौके बनेंगे. स्टडी में कहा गया है कि छतों पर 1 मेगावॉट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने से 25 लोगों को काम मिलता है जबकि जमीन पर हर मेगावॉट के लिए सिर्फ तीन लोगों की जरूरत होगी.

स्टडी में हुआ खुलासा
CEEW की सीनियर प्रोग्राम की लीडर कनिका ने कहा, फोकस ग्राउंडमाउंटेड सोलर प्लांट लगाने और सोलर पावर टैरिफ घटाने पर रहा है, लेकिन जॉब क्रिएशन के हिसाब से सबसे ज्यादा कारगर रूफटॉप सोलर प्लांट्स रहे हैं. इसलिए यह फैसला सरकार को करना है कि उसको कहां फोकस करना चाहिए.

2022 तक 40 गीगावॉट रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट का लक्ष्य
सरकार ने साल 2022 तक 40 गीगावॉट रूफटॉप सोलर पावर प्रॉजेक्ट्स का टारगेट तय किया है जबकि अब तक 2 गीगावॉट से भी कम का टारगेट हासिल हो पाया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जैसे ही रिन्यूअबल एनर्जी कपैसिटी बढ़ेगी, उसके रखरखाव, शेड्यूलिंग और फोरकास्टिंग की भी जरूरत बढ़ेगी. इसका मतलब यह हुआ कि इन एरिया में रोजगार के ज्यादा मौके बनेंगे. रूफटॉप सोलर प्लांट्स से रोजगार के मौकों के साथ उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल रहा है. हालांकि, अगर वे लोग रूफटॉप को लेकर गंभीर हैं तो उसके लिए प्रॉपर कॉन्ट्रैक्ट्स और ठोस लीगल फ्रेमवर्क की जरूरत होगी. ऐसा नहीं होने पर एनपीए बढ़ेगा और उससे लोगों के रोजगार छूटेंगे.

 


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