भारत में CEO की सैलरी सामान्‍य कर्मचारी से 416 गुना अधिक

शिक्षा/नौकरी

आय असमानता के मामले में दुनिया में भारत की रैंकिंग 132वीं है. यहां सीईओ की सैलरी एक सामान्‍य कर्मचारी की तुलना में 416 गुना अधिक है. भारत की खराब हालत मुख्‍य रूप से स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा पर सरकार के कम खर्च, बेहद खराब टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर और महिलाओं तथा पुरुषों को मिलने वाली सैलरी में बड़े अंतर की वजह से है. डेवलपमेंट फाइनेंस इंटरनेशनल व ऑक्‍सफैम ने एक साल के रिसर्च के बाद 152 देशों की रैंकिंग की है.

रैंकिंग में इन बातों पर है फोकस
रैंकिंग में तीन बातों पर गौर फरमाया गया है- सोशल स्‍कीम्‍स पर सरकारी खर्च, टैक्‍स मामले में सरकार के प्रयास और अमीर-गरीब की खाई को कम करने के लिए श्रम सुधारों पर सरकार का फोकस.

लिंग असमानता व श्रम सुधार नहीं होना हैं कारण
लिंग असमानता और श्रम अधिकारों के मामले में भारत काफी पीछे है. इसका असर आय असमानता के रूप में भी सामने आया है. भारत में 90 फीसदी से अधिक लोग कृषि और असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जहां श्रम संगठन का अभाव है. इससे श्रमिकों का शोषण बढ़ता है और अधिक सैलरी के लिए वे दबाव नहीं बना पाते हैं.


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